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Thursday, 13 October 2011

देश कि भयंकर लुट

देश में मची है भयंकर लुट, चली जा रही है भयंकर चाले फीके पद जायेंगे २ जी और गेम्स इत्यादि के कुल घोटाले जब खुलेगे आयात ओर निर्यात के अब तक बंद ताले हालाँकि हर जगह छाई है भ्रष्टाचारियों की आतंकवादी निति पर सच्चाई ज्यादा दिन तक छिप नही सकती, यही है रीति प्रश्न है क्यों सहे और कबतक सहे हम इतने घपले और लूटपाट क्यों नहीं हमसब एक होकर लाए सूराज, दे बेईमानों को मात | सबकुछ संभव है अगर हो जाये हमसब एक, पुकार रही माँ भारती जुट जाओ साथियों देश की रक्षा हेतु, सिसक रही है माँ भारती ना कराओ और इंतज़ार, लुटेरो से तंग, क्रंदन कर रही माँ भारती...

Tuesday, 11 October 2011

देश बड़ा या हमारा अहम भाव,

देश बड़ा या हमारा अहम भाव, सही फैसला करने का समय अब आ गया है   करना है कुर्बान अपना अहम भाव, मातृभूमी के रक्षा हेतु, सबको भा गया है|  देश लुट रहा है, जनता पिट रही है, भ्रष्टाचारी साम दाम दंड भेद रहे खेल   फस इस कुचाल में होगये हम भ्रमित आपस में भिड रहे खो अपना मेल |  साथियों, समझो गद्दारों कि चालो को, आओ हो जाये हम सब देशभक्त एक   नाकाम हो इनकी कुचाले, एकही मंच से लगाये हुँकार, जागृत अपना विवेक|   आजाइये एक ही मंच पर, मिले हमें असली आज़ादी, मत करिये अब निराश|...

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